हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.20.5

मंडल 6 → सूक्त 20 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 20
म॒हो द्रु॒हो अप॑ वि॒श्वायु॑ धायि॒ वज्र॑स्य॒ यत्पत॑ने॒ पादि॒ शुष्णः॑ । उ॒रु ष स॒रथं॒ सार॑थये क॒रिन्द्रः॒ कुत्सा॑य॒ सूर्य॑स्य सा॒तौ ॥ (५)
शुष्ण असुर जब वज्ज लगने से धरती पर गिरा, तब उसकी सब शक्ति नष्ट हो गई. इंद्र ने सूर्य को प्राप्त करने के निमित्त अपने सारथि कुत्स द्वारा रथ आगे बढ़वाया. (५)
When the shushna asura fell on the earth due to the vajj, all his power was destroyed. Indra carried the chariot forward with his charioteer kuts in order to attain the sun. (5)