ऋग्वेद (मंडल 6)
प्रोतये॒ वरु॑णं मि॒त्रमिन्द्रं॑ म॒रुतः॑ कृ॒ष्वाव॑से नो अ॒द्य । प्र पू॒षणं॒ विष्णु॑म॒ग्निं पुरं॑धिं सवि॒तार॒मोष॑धीः॒ पर्व॑ताँश्च ॥ (९)
हे भरद्वाज! हमारी रक्षा के लिए तुम इस समय वरुण, मित्र, मरुद्गण, पूषा, विष्णु, सर्वप्रमुख-अग्नि, सविता, ओषधियों एवं पर्वतों को स्तुति द्वारा प्रसन्न करो. (९)
O bharadwaj! To protect us, please Varuna, friends, deserts, Pusha, Vishnu, Sarvapramukha-Agni, Savita, Ushdis and mountains with praise at this time. (9)