हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.25.3

मंडल 6 → सूक्त 25 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
इन्द्र॑ जा॒मय॑ उ॒त येऽजा॑मयोऽर्वाची॒नासो॑ व॒नुषो॑ युयु॒ज्रे । त्वमे॑षां विथु॒रा शवां॑सि ज॒हि वृष्ण्या॑नि कृणु॒ही परा॑चः ॥ (३)
हे इंद्र! जो निकट या दूर स्थित शत्रु हमारे सामने न आकर हमारी हिंसा करने के लिए तैयार हैं, तुम उन शत्रुओं के बलों को हीन करो उनकी शक्ति समाप्त करो एवं उन्हें हमसे विमुख बना ओ. (३)
O Indra! Those who are ready to commit violence against us, those who are near or far away, do not come before us, you should deprive the forces of those enemies, destroy their power and turn them away from us.