हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.35.5

मंडल 6 → सूक्त 35 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
तमा नू॒नं वृ॒जन॑म॒न्यथा॑ चि॒च्छूरो॒ यच्छ॑क्र॒ वि दुरो॑ गृणी॒षे । मा निर॑रं शुक्र॒दुघ॑स्य धे॒नोरा॑ङ्गिर॒सान्ब्रह्म॑णा विप्र जिन्व ॥ (५)
हे इंद्र! तुम हमारे शत्रु को मृत्यु से मिलाओ. हे शूर एवं शत्रुहंता इंद्र! हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. हे श्वेत दूध देने वाली गो के दाता इंद्र! हम तुम्हारी स्तुतियों से कभी रुके नहीं. हे बुद्धिमान्‌ इंद्र! अंगिरागोत्र वालों को अन्न से तृप्त करो. (५)
O Indra! You meet our enemy with death. O Brave and enemy Indra! We praise you. O Indra, the giver of white milk-giving cow! We have never stopped by your praises. O wise Indra! Satisfy the people of The Angiragotra with food. (5)