ऋग्वेद (मंडल 6)
अ॒यं द्यो॑तयद॒द्युतो॒ व्य१॒॑क्तून्दो॒षा वस्तोः॑ श॒रद॒ इन्दु॑रिन्द्र । इ॒मं के॒तुम॑दधु॒र्नू चि॒दह्नां॒ शुचि॑जन्मन उ॒षस॑श्चकार ॥ (३)
हे इंद्र! इस सोमरस ने दीप्तिरहित रात, दिन, वर्ष आदि को प्रकाशित किया था. देवों ने पहले सोम को दिवसों के ध्वज के रूप में स्वीकार किया था. इसी सोमरस ने उषाओं को शोभनजन्म वाली बनाया था. (३)
O Indra! This Somras had published the night, day, year, etc. without the lights. The Devas had earlier accepted Som as the flag of days. It was this Somras that made the Ushas with divine birth. (3)