हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
यस्य॒ त्यच्छम्ब॑रं॒ मदे॒ दिवो॑दासाय र॒न्धयः॑ । अ॒यं स सोम॑ इन्द्र ते सु॒तः पिब॑ ॥ (१)
हे इंद्र! जिस सोमरस को पीने से उत्पन्न मद के कारण तुमने राजा दिवोदास के कल्याण के लिए शंबर असुर को मारा था, वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. तुम इसे पिओ. (१)
O Indra! The somras that you killed the ShambarAs for the welfare of King Divodas because of the item that you drank, the same Somras has been squeezed for you. You drink it. (1)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
यस्य॑ तीव्र॒सुतं॒ मदं॒ मध्य॒मन्तं॑ च॒ रक्ष॑से । अ॒यं स सोम॑ इन्द्र ते सु॒तः पिब॑ ॥ (२)
हे इंद्र! सोमलता का नशीला रस प्रातः, मध्याह्न एवं संध्या के यज्ञों में निचोड़ा जाता है. तुम उसे पीते हो. वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. तुम इसे पिओ. (२)
O Indra! The intoxicating juice of somalata is squeezed in the yagnas of morning, mid-day and evening. You drink it. The same somras have been squeezed for you. You drink it. (2)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
यस्य॒ गा अ॒न्तरश्म॑नो॒ मदे॑ दृ॒ळ्हा अ॒वासृ॑जः । अ॒यं स सोम॑ इन्द्र ते सु॒तः पिब॑ ॥ (३)
हे इंद्र! जिस सोमरस के नशे में तुमने पर्वत के घेरे में दृढ़तापूर्वक बंद गायों को छुड़ाया था, वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. इसे तुम पिओ. (३)
O Indra! The same Somras, in whose drunkenness you rescued the cows firmly locked in the mountain circle, has been squeezed for you. Drink it to you. (3)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
यस्य॑ मन्दा॒नो अन्ध॑सो॒ माघो॑नं दधि॒षे शवः॑ । अ॒यं स सोम॑ इन्द्र ते सु॒तः पिब॑ ॥ (४)
हे इंद्र! जिस सोमरसरूप अन्न के कारण प्रसन्न होकर तुम अतिशय बल धारण करते हो, वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. इसे तुम पिओ. (४)
O Indra! The same somras, which you are pleased with because of the food in the form of somersa, you hold excessive force, the same somras has been squeezed for you. Drink it to you. (4)