हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.43.2

मंडल 6 → सूक्त 43 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
यस्य॑ तीव्र॒सुतं॒ मदं॒ मध्य॒मन्तं॑ च॒ रक्ष॑से । अ॒यं स सोम॑ इन्द्र ते सु॒तः पिब॑ ॥ (२)
हे इंद्र! सोमलता का नशीला रस प्रातः, मध्याह्न एवं संध्या के यज्ञों में निचोड़ा जाता है. तुम उसे पीते हो. वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. तुम इसे पिओ. (२)
O Indra! The intoxicating juice of somalata is squeezed in the yagnas of morning, mid-day and evening. You drink it. The same somras have been squeezed for you. You drink it. (2)