हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.44.18

मंडल 6 → सूक्त 44 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
आ॒सु ष्मा॑ णो मघवन्निन्द्र पृ॒त्स्व१॒॑स्मभ्यं॒ महि॒ वरि॑वः सु॒गं कः॑ । अ॒पां तो॒कस्य॒ तन॑यस्य जे॒ष इन्द्र॑ सू॒रीन्कृ॑णु॒हि स्मा॑ नो अ॒र्धम् ॥ (१८)
हे धनस्वामी इंद्र! इन सभी संग्रामं में हमें महान्‌ धन की प्राप्ति सरल बनाओ. तुम हम स्तोताओं को जल, पुत्र, पौत्र की जय के निमित्त समृद्ध बनाओ एवं शत्रुनाश की शक्ति दो. (१८)
O Dhanaswami Indra! In all these battles, make it easy for us to get great wealth. Let us make the psalms rich for the glory of water, son, grandson, and give them the power of destruction. (18)