हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.44.3

मंडल 6 → सूक्त 44 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
येन॑ वृ॒द्धो न शव॑सा तु॒रो न स्वाभि॑रू॒तिभिः॑ । सोमः॑ सु॒तः स इ॑न्द्र॒ तेऽस्ति॑ स्वधापते॒ मदः॑ ॥ (३)
हे सोमरूप अन्न के रक्षक इंद्र! तुम जिस सोमरस को पीकर परम बलवान्‌ बनते हो एवं अपने रक्षक मरुतों के साथ मिलकर शत्रुओं का नाश करते हो, वही सोमरस निचुड़ने पर तुम्हें प्रसन्नता प्रदान करे. (३)
O Somrupa the protector of the food Indra! May the Somras, which you drink and become the supreme force and destroy the enemies together with your protectors, the same Somaras may give you happiness when they are deserted. (3)