ऋग्वेद (मंडल 6)
य आन॑यत्परा॒वतः॒ सुनी॑ती तु॒र्वशं॒ यदु॑म् । इन्द्रः॒ स नो॒ युवा॒ सखा॑ ॥ (१)
जो इंद्र! अपनी उत्तम नीति द्वारा तुर्वश एवं यदु नामक राजाओं को दूर से लाए, वे युवा इंद्र हमारे मित्र हों. (१)
Joe Indra! By his best policy, the kings of Turvash and Yadu were brought from afar, let those young Indras be our friends. (1)
ऋग्वेद (मंडल 6)
अ॒वि॒प्रे चि॒द्वयो॒ दध॑दना॒शुना॑ चि॒दर्व॑ता । इन्द्रो॒ जेता॑ हि॒तं धन॑म् ॥ (२)
इंद्र स्तुति न करने वाले को भी अन्न देते हैं एवं धीमी चाल वाले घोड़े पर चढ़कर शत्रुओं के छिपे धन को जीतते हैं. (२)
Indra also gives food to those who do not praise and climbs on a slow-moving horse to conquer the hidden wealth of the enemies. (2)
ऋग्वेद (मंडल 6)
म॒हीर॑स्य॒ प्रणी॑तयः पू॒र्वीरु॒त प्रश॑स्तयः । नास्य॑ क्षीयन्त ऊ॒तयः॑ ॥ (३)
इंद्र की उत्तम नीतियां महान् एवं स्तुतियां अनेक हैं. इंद्र के रक्षासाधन कभी समाप्त नहीं होते. (३)
Indra's best policies are great and many praises. Indra's rakshasadhan never ends. (3)
ऋग्वेद (मंडल 6)
सखा॑यो॒ ब्रह्म॑वाह॒सेऽर्च॑त॒ प्र च॑ गायत । स हि नः॒ प्रम॑तिर्म॒ही ॥ (४)
हे मित्ररूप स्तोताओ! मंत्रं द्वारा बुलाने योग्य इंद्र की पूजा एवं स्तुति करो. वे हमें उत्तम बुद्धि देते हैं. (४)
These friendly hymns! Worship and praise indra who is called by mantras. They give us the best wisdom. (4)
ऋग्वेद (मंडल 6)
त्वमेक॑स्य वृत्रहन्नवि॒ता द्वयो॑रसि । उ॒तेदृशे॒ यथा॑ व॒यम् ॥ (५)
हे वृत्रनाशक इंद्र! तुम एक या दो स्तोताओं के रक्षक हो. हमारे जैसे लोगों की तुम्हीं रक्षा करते हो. (५)
O the conqueror Indra! You are the protector of one or two hymns. You protect people like us. (5)
ऋग्वेद (मंडल 6)
नय॒सीद्वति॒ द्विषः॑ कृ॒णोष्यु॑क्थशं॒सिनः॑ । नृभिः॑ सु॒वीर॑ उच्यसे ॥ (६)
हे इंद्र! द्वेष करने वालों को हमसे दूर करो एवं हम स्तोताओं को समृद्ध बनाओ. मनुष्य शोभनपुत्र देने वाले इंद्र की स्तुति करते हैं. (६)
O Indra! Take away from us the malice and let us enrich the hymns. Humans praise Indra, who gives the son of Shobhan. (6)
ऋग्वेद (मंडल 6)
ब्र॒ह्माणं॒ ब्रह्म॑वाहसं गी॒र्भिः सखा॑यमृ॒ग्मिय॑म् । गां न दो॒हसे॑ हुवे ॥ (७)
मैं गाय के समान अभिलाषारूप दूध दुहुने के लिए इंद्र को स्तुतियों द्वारा बुलाता हूं. इंद्र महान्, स्तुतियां स्वीकार करने वाले एवं मित्र हैं. (७)
I call Indra with praises to milk milk as a cow's desire. Indra is great, acceptable of praises and a friend. (7)
ऋग्वेद (मंडल 6)
यस्य॒ विश्वा॑नि॒ हस्त॑योरू॒चुर्वसू॑नि॒ नि द्वि॒ता । वी॒रस्य॑ पृतना॒षहः॑ ॥ (८)
ऋषि लोगों ने कहा था कि शत्रुसेना को हराने वाले वीर इंद्र के दोनों हाथों में सभी प्रकार की संपत्तियां हैं. (८)
The sages had said that the heroic Indra, who defeated the enemy army, has all kinds of properties in both his hands. (8)