हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.45.5

मंडल 6 → सूक्त 45 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
त्वमेक॑स्य वृत्रहन्नवि॒ता द्वयो॑रसि । उ॒तेदृशे॒ यथा॑ व॒यम् ॥ (५)
हे वृत्रनाशक इंद्र! तुम एक या दो स्तोताओं के रक्षक हो. हमारे जैसे लोगों की तुम्हीं रक्षा करते हो. (५)
O the conqueror Indra! You are the protector of one or two hymns. You protect people like us. (5)