हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.45.14

मंडल 6 → सूक्त 45 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
या त॑ ऊ॒तिर॑मित्रहन्म॒क्षूज॑वस्त॒मास॑ति । तया॑ नो हिनुही॒ रथ॑म् ॥ (१४)
हे शत्रुनाशक इंद्र! तुम अपनी अतिशय तीव्रगति से हमारे रथ को शत्रुविजय के निमित्त आगे बढ़ाओ. (१४)
O enemies Indra! You must move our chariot forward for the sake of enemyism with your very fast speed. (14)