ऋग्वेद (मंडल 6)
य एक॒ इत्तमु॑ ष्टुहि कृष्टी॒नां विच॑र्षणिः । पति॑र्ज॒ज्ञे वृष॑क्रतुः ॥ (१६)
उन्हीं एकमात्र इंद्र की स्तुति करो जो प्रजाओं के स्वामी, विशेष द्रष्टा एवं वर्षा करने वाले के रूप में उत्पन्न हुए थे. (१६)
Praise the only Indra who was born as the lord of the people, the special seer and the rain-doer. (16)