ऋग्वेद (मंडल 6)
अधि॑ बृ॒बुः प॑णी॒नां वर्षि॑ष्ठे मू॒र्धन्न॑स्थात् । उ॒रुः कक्षो॒ न गा॒ङ्ग्यः ॥ (३१)
बृबु पणियों के बीच इतने ऊंचे स्थान पर बैठा था, जितना ऊंचा गंगा का तट होता है. (३१)
Bribu sat in such a high place among the valleys as the bank of the high Ganga. (31)