हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.45.9

मंडल 6 → सूक्त 45 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
वि दृ॒ळ्हानि॑ चिदद्रिवो॒ जना॑नां शचीपते । वृ॒ह मा॒या अ॑नानत ॥ (९)
हे वज्रधारी एवं यज्ञ के स्वामी इंद्र! तुम शत्रुओं के दृढ़ नगरों को भग्न करो. हे न झुकने वाले इंद्र! तुम शत्रुओं की माया को समाप्त करो. (९)
O Vajradhari and Lord of the Yajna Indra! You break down the fortified cities of the enemies. O indra who does not bow down! You end the maya of the enemies. (9)