ऋग्वेद (मंडल 6)
अपि॒ पन्था॑मगन्महि स्वस्ति॒गाम॑ने॒हस॑म् । येन॒ विश्वाः॒ परि॒ द्विषो॑ वृ॒णक्ति॑ वि॒न्दते॒ वसु॑ ॥ (१६)
हम उस सुगम एवं पापरहित मार्ग को पा गए हैं, जिस पर चलने से सभी शत्रु नष्ट होते हैं और धन प्राप्त होता है. (१६)
We have found the easy and sinless path on which all enemies are destroyed and wealth is obtained. (16)