हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
उदु॒ त्यच्चक्षु॒र्महि॑ मि॒त्रयो॒राँ एति॑ प्रि॒यं वरु॑णयो॒रद॑ब्धम् । ऋ॒तस्य॒ शुचि॑ दर्श॒तमनी॑कं रु॒क्मो न दि॒व उदि॑ता॒ व्य॑द्यौत् ॥ (१)
सूर्य, मित्र एवं वरुण का प्रसिद्ध, प्रकाश करने वाला, विस्तृत, प्रिय, अहिंसित, शुद्ध एवं दर्शनीय तेज सबके सामने ऊपर उठता है एवं आकाश के आभूषण के समान प्रकाशित होता है. (१)
The famous, light-doering, vivid, beloved, non-violent, pure and visible brightness of the sun, friend and Varuna rises up in front of everyone and is illuminated like the ornament of the sky. (1)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
वेद॒ यस्त्रीणि॑ वि॒दथा॑न्येषां दे॒वानां॒ जन्म॑ सनु॒तरा च॒ विप्रः॑ । ऋ॒जु मर्ते॑षु वृजि॒ना च॒ पश्य॑न्न॒भि च॑ष्टे॒ सूरो॑ अ॒र्य एवा॑न् ॥ (२)
जो सूर्य तीन जानने योग्य स्थानों को जानते हैं, जो मेधावी-सूर्य इन तीनों लोकों में छिपे देवों के जन्मस्थान को जानते हैं, वे ही मानवों की भलाई-बुराई को देखते हैं एवं मानवों के स्वामी बनकर अभिलाषाएं पूरी करते हैं. (२)
The suns who know the three places of knowledge, the bright suns who know the birthplace of the gods hidden in these three realms, they see the good and evil of human beings and fulfill the desires by becoming masters of human beings. (2)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
स्तु॒ष उ॑ वो म॒ह ऋ॒तस्य॑ गो॒पानदि॑तिं मि॒त्रं वरु॑णं सुजा॒तान् । अ॒र्य॒मणं॒ भग॒मद॑ब्धधीती॒नच्छा॑ वोचे सध॒न्यः॑ पाव॒कान् ॥ (३)
हम महान्‌, यज्ञ के रक्षक एवं शोभन जन्म वाले अदिति, मित्र, वरुण, अर्यमा एवं भग की स्तुति करते हैं. मैं अहिंसित कमो वाले, धनसंपन्न एवं पवित्र करने वाले देवों का यश वर्णन करता हूं. (३)
We praise the great, the protector of the yagna and the brave born Aditi, friend, Varuna, Aryama and Bhaga. I praise the non-violent kamo, the rich and the sanctifying gods. (3)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
रि॒शाद॑सः॒ सत्प॑ती॒ँरद॑ब्धान्म॒हो राज्ञः॑ सुवस॒नस्य॑ दा॒तॄन् । यूनः॑ सुक्ष॒त्रान्क्षय॑तो दि॒वो नॄना॑दि॒त्यान्या॒म्यदि॑तिं दुवो॒यु ॥ (४)
हे हिंसकों को दूर भगाने वाले, सज्जनों का पालन करने वाले, अपराजेय, महान्‌, स्वामी, शोभन-निवासस्थान देने वाले, युवा शोभन-बल वाले, सर्वव्यापक एवं स्वर्ग के नेता आदित्यो! मैं अपनी परिचर्या करने वाली अदिति की शरण जाता हूं. (४)
O you who drive away the violent, follow the gentlemen, the unbeatable, the great, the masters, the givers of adornment, the young adornments, the all-encompassing and the leaders of heaven, Adityas! I go to the shelter of Aditi, who takes care of me. (4)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
द्यौ॒३॒॑ष्पितः॒ पृथि॑वि॒ मात॒रध्रु॒गग्ने॑ भ्रातर्वसवो मृ॒ळता॑ नः । विश्व॑ आदित्या अदिते स॒जोषा॑ अ॒स्मभ्यं॒ शर्म॑ बहु॒लं वि य॑न्त ॥ (५)
हे पिता रूप स्वर्ग, माता रूप धरती एवं भ्राता रूप अग्नि तथा वसुओ! तुम सब हमें सुखी करो. हे सब आदित्यो एवं अदिति! तुम समान प्रेम वाले होकर हमं अधिक सुख दो. (५)
O father as heaven, mother as earth and brotherly form agni and vasuo! All of you make us happy. Hey all Aditya and Aditi! You have the same love and give us more happiness. (5)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
मा नो॒ वृका॑य वृ॒क्ये॑ समस्मा अघाय॒ते री॑रधता यजत्राः । यू॒यं हि ष्ठा र॒थ्यो॑ नस्त॒नूनां॑ यू॒यं दक्ष॑स्य॒ वच॑सो बभू॒व ॥ (६)
हे यज्ञपात्र देवो! हमारा अनिष्ट चाहने वाले वृक एवं वृकी को हमे मत सौंपना. तुम ही हमारे शरीर, बल और वाणी के रक्षक रहे हो. (६)
O god of yajnapatra! Don't give us the kidneys and kidneys that want us to be evil. You are the protector of our body, strength and speech. (6)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
मा व॒ एनो॑ अ॒न्यकृ॑तं भुजेम॒ मा तत्क॑र्म वसवो॒ यच्चय॑ध्वे । विश्व॑स्य॒ हि क्षय॑थ विश्वदेवाः स्व॒यं रि॒पुस्त॒न्वं॑ रीरिषीष्ट ॥ (७)
हे देवो! तुम्हारे कृपापात्र हम दूसरों के द्वारा किए गए पाप का कष्ट न भोगें. हे वसुओ! हम वह काम न करें, जिसके लिए तुम मना करो. हे विश्वेदेव! तुम सबके स्वामी हो. हमारा शत्रु अपने शरीर का स्वयं नाश करे. (७)
Oh, God! Please, please, let us not suffer from the sin sin committed by others. O Vasuo! Let's not do the work for which you refuse. O God! You are the master of all. Let our enemy destroy his own body. (7)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
नम॒ इदु॒ग्रं नम॒ आ वि॑वासे॒ नमो॑ दाधार पृथि॒वीमु॒त द्याम् । नमो॑ दे॒वेभ्यो॒ नम॑ ईश एषां कृ॒तं चि॒देनो॒ नम॒सा वि॑वासे ॥ (८)
नमस्कार सबसे बढ़कर है. इसी कारण मैं नमस्कार करता हूं. नमस्कार ने ही धरती और स्वर्ग को धारण किया है. देवों को नमस्कार है. नमस्कार इन देवों का स्वामी है. मैं नमस्कार द्वारा पापों को दूर करता हूं. (८)
Hello is the most. That's why I greet. It is the salutation that holds the earth and the heaven. Greetings to the gods. Greetings are the lord of these gods. I remove sins by greetings. (8)
Page 1 of 2Next →