ऋग्वेद (मंडल 6)
द्यौ॒३॒॑ष्पितः॒ पृथि॑वि॒ मात॒रध्रु॒गग्ने॑ भ्रातर्वसवो मृ॒ळता॑ नः । विश्व॑ आदित्या अदिते स॒जोषा॑ अ॒स्मभ्यं॒ शर्म॑ बहु॒लं वि य॑न्त ॥ (५)
हे पिता रूप स्वर्ग, माता रूप धरती एवं भ्राता रूप अग्नि तथा वसुओ! तुम सब हमें सुखी करो. हे सब आदित्यो एवं अदिति! तुम समान प्रेम वाले होकर हमं अधिक सुख दो. (५)
O father as heaven, mother as earth and brotherly form agni and vasuo! All of you make us happy. Hey all Aditya and Aditi! You have the same love and give us more happiness. (5)