ऋग्वेद (मंडल 6)
अग्नी॑पर्जन्या॒वव॑तं॒ धियं॑ मे॒ऽस्मिन्हवे॑ सुहवा सुष्टु॒तिं नः॑ । इळा॑म॒न्यो ज॒नय॒द्गर्भ॑म॒न्यः प्र॒जाव॑ती॒रिष॒ आ ध॑त्तम॒स्मे ॥ (१६)
हे अग्नि और पर्जन्य! तुम हमारे यज्ञकार्य की रक्षा करो. हे शोभन आह्वान वाले देवो! हमारी सुदर स्तुति को सुनो. तुम में से पर्जन्य अन्न उत्पन्न करता है एवं अग्नि गर्भ उत्पन्न करते हैं. तुम हमें संतान-युक्त अन्न दो. (१६)
O agni and rain! You protect our sacrificial work. O god of adornment! Listen to our gentle praise. Out of you, the food produces food and agni produces the womb. You give us offspring-rich food. (16)