हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.52.15

मंडल 6 → सूक्त 52 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 52
ये के च॒ ज्मा म॒हिनो॒ अहि॑माया दि॒वो ज॑ज्ञि॒रे अ॒पां स॒धस्थे॑ । ते अ॒स्मभ्य॑मि॒षये॒ विश्व॒मायुः॒ क्षप॑ उ॒स्रा व॑रिवस्यन्तु दे॒वाः ॥ (१५)
महान्‌ व संहारक बुद्धि वाले जो देवगण धरती, स्वर्ग एवं अंतरिक्ष में उत्पन्न हुए हैं, वे हमें और हमारी संतान को रात-दिन जीवन भर अन्न दें. (१५)
The gods with great and destructive intellects who have been born in the earth, heaven and space, may they give us and our children food day and night for the rest of their lives. (15)