ऋग्वेद (मंडल 6)
व॒यमु॑ त्वा पथस्पते॒ रथं॒ न वाज॑सातये । धि॒ये पू॑षन्नयुज्महि ॥ (१)
हे मार्गपालक पूषा! हम अन्नलाभ एवं यज्ञपूर्ति के लिए तुम्हें युद्ध में रथ के समान अपने सामने करते हैं. (१)
O guiding Father! We make you like a chariot in battle for the sake of food and sacrifice. (1)