ऋग्वेद (मंडल 6)
अ॒भि नो॒ नर्यं॒ वसु॑ वी॒रं प्रय॑तदक्षिणम् । वा॒मं गृ॒हप॑तिं नय ॥ (२)
हे पूषा! मानव हितकारी, धन के द्वारा दरिद्रता नष्ट करने वाला, प्राचीन काल में धनदानकर्तता एक गृहस्वामी हमें दो. (२)
O God! Give us a homeowner who is a human benefactor, destroying poverty by money, giving us wealth in ancient times. (2)