हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.57.2

मंडल 6 → सूक्त 57 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 57
सोम॑म॒न्य उपा॑सद॒त्पात॑वे च॒म्वोः॑ सु॒तम् । क॒र॒म्भम॒न्य इ॑च्छति ॥ (२)
हे इंद्र व पूषा! तुम में से एक अर्थात्‌ इंद्र चमस में निचुड़े हुए सोमरस पीने के लिए जाते हैं तथा दूसरे अर्थात्‌ पूषा जौ का सत्तू खाना चाहते हैं. (२)
O Indra and Pusha! One of you, i.e., Indra, goes to drink the sauteed somras in the spoon and the other i.e. pusha wants to eat the sattu of barley. (2)