हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.57.3

मंडल 6 → सूक्त 57 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 57
अ॒जा अ॒न्यस्य॒ वह्न॑यो॒ हरी॑ अ॒न्यस्य॒ सम्भृ॑ता । ताभ्यां॑ वृ॒त्राणि॑ जिघ्नते ॥ (३)
हे पूषा एवं इंद्र! तुम में से पहले को बकरे खींचते हैं एवं दूसरे को दो मोटेताजे घोड़े. इंद्र उन्हीं घोड़ों की सहायता से वृत्र को मारते हैं. (३)
O God and Indra! You pull the goats to the first and the other to two fat horses. Indra kills Vritra with the help of the same horses. (3)