ऋग्वेद (मंडल 6)
शु॒क्रं ते॑ अ॒न्यद्य॑ज॒तं ते॑ अ॒न्यद्विषु॑रूपे॒ अह॑नी॒ द्यौरि॑वासि । विश्वा॒ हि मा॒या अव॑सि स्वधावो भ॒द्रा ते॑ पूषन्नि॒ह रा॒तिर॑स्तु ॥ (१)
हे पूषा! तुम्हारा शुक्लवर्णरूप अर्थात् दिन अलग है एवं कृष्णवर्णरूप अर्थात् रात अलग है. रात-दिन परस्पर भिन्न रूप वाले हैं. तुम सूर्य के समान तेजस्वी हो. हे अन्नस्वामी पूषा! तुम सब ज्ञानों को धारण करते हो. तुम्हारा दान कल्याणकारी हो. (१)
O God! Your Shuklavarna form means day is different and Krishnavarna form i.e. night is different. Day and night are of different nature. You are as bright as the sun. O Annaswami Pusha! You possess all knowledge. Your charity be beneficial. (1)