ऋग्वेद (मंडल 6)
शु॒क्रं ते॑ अ॒न्यद्य॑ज॒तं ते॑ अ॒न्यद्विषु॑रूपे॒ अह॑नी॒ द्यौरि॑वासि । विश्वा॒ हि मा॒या अव॑सि स्वधावो भ॒द्रा ते॑ पूषन्नि॒ह रा॒तिर॑स्तु ॥ (१)
हे पूषा! तुम्हारा शुक्लवर्णरूप अर्थात् दिन अलग है एवं कृष्णवर्णरूप अर्थात् रात अलग है. रात-दिन परस्पर भिन्न रूप वाले हैं. तुम सूर्य के समान तेजस्वी हो. हे अन्नस्वामी पूषा! तुम सब ज्ञानों को धारण करते हो. तुम्हारा दान कल्याणकारी हो. (१)
O God! Your Shuklavarna form means day is different and Krishnavarna form i.e. night is different. Day and night are of different nature. You are as bright as the sun. O Annaswami Pusha! You possess all knowledge. Your charity be beneficial. (1)
ऋग्वेद (मंडल 6)
अ॒जाश्वः॑ पशु॒पा वाज॑पस्त्यो धियंजि॒न्वो भुव॑ने॒ विश्वे॒ अर्पि॑तः । अष्ट्रां॑ पू॒षा शि॑थि॒रामु॒द्वरी॑वृजत्सं॒चक्षा॑णो॒ भुव॑ना दे॒व ई॑यते ॥ (२)
बकरेरूप घोड़ों वाले, पशुपालक, अन्नपूर्ण घर वाले, स्तोताओं को प्रसन्न करने वाले एवं सारे संसार के ऊपर स्थापित पूषा देव सब प्राणियों को प्रकाशित करते हैं एवं लौहदंड उठाकर आकाश में घूमते हैं (२)
The God of goats, the shepherds, the granular householders, the psalms, and the God who is set over the whole world, illuminates all beings and carries the iron rod and walks around in the sky (2)
ऋग्वेद (मंडल 6)
यास्ते॑ पूष॒न्नावो॑ अ॒न्तः स॑मु॒द्रे हि॑र॒ण्ययी॑र॒न्तरि॑क्षे॒ चर॑न्ति । ताभि॑र्यासि दू॒त्यां सूर्य॑स्य॒ कामे॑न कृत॒ श्रव॑ इ॒च्छमा॑नः ॥ (३)
हे पूषा! तुम्हारी जो सोने से बनी हुई नावें समुद्र के बीच में चलती हैं, उनके द्वारा तुम सूर्य के दूत बनकर चलते हो. तुम अन्न की अभिलाषा करते हुए स्तोताओं द्वारा पशु भेंट करके वश में कर लिए जाते हो. (३)
O God! By the boats made of gold that walk in the middle of the sea, you walk as messengers of the sun. You are subdued by the stoetas by offering animals while you desire food. (3)
ऋग्वेद (मंडल 6)
पू॒षा सु॒बन्धु॑र्दि॒व आ पृ॑थि॒व्या इ॒ळस्पति॑र्म॒घवा॑ द॒स्मव॑र्चाः । यं दे॒वासो॒ अद॑दुः सू॒र्यायै॒ कामे॑न कृ॒तं त॒वसं॒ स्वञ्च॑म् ॥ (४)
पूषा स्वर्ग एवं धरती के शोभनबंधु, अन्न के स्वामी, धनसंपन्न, दर्शनीय रूप वाले, शक्तिशाली, स्वेच्छा से भेंट किए गए पशु के कारण प्रसन्न होने वाले एवं शोभनगति हैं. देवों ने उन्हें सूर्यपत्नी को दे दिया था. (४)
Pusha is the Shobhanabandhu of heaven and earth, the lord of the food, the rich, the seeable, the powerful, the willing to be happy and adorned because of the voluntarily gifted animal. The gods gave them to surya wife. (4)