हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.58.4

मंडल 6 → सूक्त 58 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 58
पू॒षा सु॒बन्धु॑र्दि॒व आ पृ॑थि॒व्या इ॒ळस्पति॑र्म॒घवा॑ द॒स्मव॑र्चाः । यं दे॒वासो॒ अद॑दुः सू॒र्यायै॒ कामे॑न कृ॒तं त॒वसं॒ स्वञ्च॑म् ॥ (४)
पूषा स्वर्ग एवं धरती के शोभनबंधु, अन्न के स्वामी, धनसंपन्न, दर्शनीय रूप वाले, शक्तिशाली, स्वेच्छा से भेंट किए गए पशु के कारण प्रसन्न होने वाले एवं शोभनगति हैं. देवों ने उन्हें सूर्यपत्नी को दे दिया था. (४)
Pusha is the Shobhanabandhu of heaven and earth, the lord of the food, the rich, the seeable, the powerful, the willing to be happy and adorned because of the voluntarily gifted animal. The gods gave them to surya wife. (4)