ऋग्वेद (मंडल 6)
इन्द्रा॑ग्नी यु॒वोरपि॒ वसु॑ दि॒व्यानि॒ पार्थि॑वा । आ न॑ इ॒ह प्र य॑च्छतं र॒यिं वि॒श्वायु॑पोषसम् ॥ (९)
हे इंद्र एवं अग्नि! दिव्य और पार्थिव दोनों प्रकार के धन तुम्हारे ही हैं. इस यज्ञ में हमें संपूर्ण आयु को पुष्ट करने वाला धन दो. (९)
O Indra and Agni! Both divine and earthly wealth are yours. In this yajna, give us the money that will confirm the whole age. (9)