हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.60.11

मंडल 6 → सूक्त 60 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
य इ॒द्ध आ॒विवा॑सति सु॒म्नमिन्द्र॑स्य॒ मर्त्यः॑ । द्यु॒म्नाय॑ सु॒तरा॑ अ॒पः ॥ (११)
जो मनुष्य प्रज्वलित अग्नि में इंद्र के लक्ष्य से सुखदायक हवि देता है, इंद्र उसके अन्नोत्पादन के लिए शोभन जल बरसाते हैं. (११)
The man who gives a soothing from the goal of Indra in the ignited agni, Indra pours out soothing water for his production of food. (11)