ऋग्वेद (मंडल 6)
ता हु॑वे॒ ययो॑रि॒दं प॒प्ने विश्वं॑ पु॒रा कृ॒तम् । इ॒न्द्रा॒ग्नी न म॑र्धतः ॥ (४)
मैं उन्हीं इंद्र एवं अग्नि को बुलाता हूं, जिनके वीरतापूर्ण कर्मो का ऋषियों ने वर्णन किया है, एवं जो अपने स्तोताओं की हिंसा नहीं करते. (४)
I call upon the same Indra and Agni, whose heroic deeds have been described by the sages, and who do not do violence to their stoes. (4)