ऋग्वेद (मंडल 6)
इ॒यम॑ददाद्रभ॒समृ॑ण॒च्युतं॒ दिवो॑दासं वध्र्य॒श्वाय॑ दा॒शुषे॑ । या शश्व॑न्तमाच॒खादा॑व॒सं प॒णिं ता ते॑ दा॒त्राणि॑ तवि॒षा स॑रस्वति ॥ (१)
इन सरस्वती ने हव्य देने वाले वध्रयश्च को शीघ्रगामी एवं ऋण से छुटकारा दिलाने वाला दिवोदास नामक पुत्र दिया था. इन्होंने सदा अपने को तृप्त करने वाले एवं दान न करने वाले पणि को नष्ट किया था. तुम्हारे ये दान महान् हैं. (१)
These Saraswatis had given a son named Divodas to the wise man who gave the havan, the quick and rid of debt. They had always destroyed the people who had satisfied themselves and did not give charity. These donations of yours are great. (1)