हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.60.15

मंडल 6 → सूक्त 60 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
इन्द्रा॑ग्नी श‍ृणु॒तं हवं॒ यज॑मानस्य सुन्व॒तः । वी॒तं ह॒व्यान्या ग॑तं॒ पिब॑तं सो॒म्यं मधु॑ ॥ (१५)
हे इंद्र एवं अग्नि! तुम सोमरस निचोड़ने वाले यजमान की पुकार सुनो, उसके हव्य की अभिलाषा करो. उसके यज्ञ में आओ एवं उसका मधुर सोम पिओ. (१५)
O Indra and Agni! You listen to the call of the host who squeezes the Somras, wish for his voice. Come to his yajna and drink his sweet mon. (15)