हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.62.10

मंडल 6 → सूक्त 62 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
अन्त॑रैश्च॒क्रैस्तन॑याय व॒र्तिर्द्यु॒मता या॑तं नृ॒वता॒ रथे॑न । सनु॑त्येन॒ त्यज॑सा॒ मर्त्य॑स्य वनुष्य॒तामपि॑ शी॒र्षा व॑वृक्तम् ॥ (१०)
हे अश्विनीकुमारो! तुम उत्तम पहियों, प्रकाशयुक्त एवं सारथि वाले रथ पर सवार होकर संतान देने के लिए हमारे घर आओ एवं छिपे हुए क्रोध द्वारा अपने भक्तों के विघ्नकर्ताओं के सिर काट डालो. (१०)
O Ashwinikumaro! You come to our house to give children on a chariot with the best wheels, lightened and charioteered and cut off the heads of the obstacles of your devotees by hidden anger. (10)