ऋग्वेद (मंडल 6)
य ईं॒ राजा॑नावृतु॒था वि॒दध॒द्रज॑सो मि॒त्रो वरु॑ण॒श्चिके॑तत् । ग॒म्भी॒राय॒ रक्ष॑से हे॒तिम॑स्य॒ द्रोघा॑य चि॒द्वच॑स॒ आन॑वाय ॥ (९)
जो मनुष्य सभी लोकों के स्वामी अश्विनीकुमारों की समय-समय पर सेवा करता है, उसे मित्र और वरुण जानते हैं. वह महाबली राक्षस एवं द्रोहात्मक वचन बोलने वाले मनुष्य पर शस्त्र फेंकता है. (९)
The man who serves the masters of all the worlds, Ashwinikumaras from time to time, is known to friends and Varuna. He throws weapons at the demon of Mahabali and a man who speaks abusive words. (9)