ऋग्वेद (मंडल 6)
सं वां॑ श॒ता ना॑सत्या स॒हस्राश्वा॑नां पुरु॒पन्था॑ गि॒रे दा॑त् । भ॒रद्वा॑जाय वीर॒ नू गि॒रे दा॑द्ध॒ता रक्षां॑सि पुरुदंससा स्युः ॥ (१०)
हे अश्चिनीकुमारो! पुरुपंथा नामक राजा ने तुम्हारे स्तोताओं को सैकड़ों और हजारों घोड़े दिए थे. हे वीरो! तुम्हारे स्तोता मुझ भरद्वाज को यह दक्षिणा दें. हे अनेक कर्म करने वाले देवो! तुम्हारी कृपा से राक्षस नष्ट हों. (१०)
O aschinikumaro! A king named Purupantha gave your stoes hundreds and thousands of horses. O Hero! Give this dakshina to your stotha bharadwaj me. O gods who do many things! Let the monsters be destroyed by your grace. (10)