ऋग्वेद (मंडल 6)
क्व१॒॑ त्या व॒ल्गू पु॑रुहू॒ताद्य दू॒तो न स्तोमो॑ऽविद॒न्नम॑स्वान् । आ यो अ॒र्वाङ्नास॑त्या व॒वर्त॒ प्रेष्ठा॒ ह्यस॑थो अस्य॒ मन्म॑न् ॥ (१)
सुंदर एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए अश्विनीकुमार जहां कहीं रहते हैं, वहीं हव्यसहित स्तोत्र उन्हें दूत के समान प्राप्त हों. इसी स्तोत्र ने अश्विनीकुमारों को मेरी ओर अभिमुख किया था. हे अश्वििनीकुमारो! तुम स्तोता की स्तुतियों पर परम प्रसन्न होते हो. (१)
Wherever The Beautiful and Many-called Ashwinikumar lives, he may receive hymns like an emissary. It was this hymn that had attracted the Ashwinikumars to me. O Ashwanikumaro! You are extremely pleased with the praises of The Psalms. (1)
ऋग्वेद (मंडल 6)
अरं॑ मे गन्तं॒ हव॑नाया॒स्मै गृ॑णा॒ना यथा॒ पिबा॑थो॒ अन्धः॑ । परि॑ ह॒ त्यद्व॒र्तिर्या॑थो रि॒षो न यत्परो॒ नान्त॑रस्तुतु॒र्यात् ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो! मेरे बुलाने पर तुम भली प्रकार आओ एवं मेरी स्तुति सुनकर सोमरस पिओ. शत्रु से हमारे घर की इस प्रकार रक्षा करो कि कोई भी उसे हानि न पहुंचावे (२)
O Ashwinikumaro! Come well at my call and hear my praise and drink somers. Protect our house from the enemy in such a way that no one harms it(2)
ऋग्वेद (मंडल 6)
अका॑रि वा॒मन्ध॑सो॒ वरी॑म॒न्नस्ता॑रि ब॒र्हिः सु॑प्राय॒णत॑मम् । उ॒त्ता॒नह॑स्तो युव॒युर्व॑व॒न्दा वां॒ नक्ष॑न्तो॒ अद्र॑य आञ्जन् ॥ (३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे कारण सोमरस निचोड़ा गया है, मुलायम कुश बिछाए गए हैं, वुम्हारी कामना करता हुआ स्तोता हाथ जोड़कर स्तुति करता है एवं तुम्हें व्याप्त करते हुए पत्थर सोमरस निकाल रहे हैं. (३)
O Ashwinikumaro! Because of you, the somras have been squeezed, the soft kushs have been laid, the hymn, wishing the woman, praises with folded hands and the stones are removing the somras while pervading you. (3)
ऋग्वेद (मंडल 6)
ऊ॒र्ध्वो वा॑म॒ग्निर॑ध्व॒रेष्व॑स्था॒त्प्र रा॒तिरे॑ति जू॒र्णिनी॑ घृ॒ताची॑ । प्र होता॑ गू॒र्तम॑ना उरा॒णोऽयु॑क्त॒ यो नास॑त्या॒ हवी॑मन् ॥ (४)
हे अश्चिनीकुमारो! हव्य एवं घृत के स्वामी अग्नि तुम्हारे यज्ञ में ऊंचे उठते हैं. जो स्तोता तुम्हारा स्तोत्र बोलता है, वही स्तोता अनेक यज्ञकर्ता एवं उत्साही होता है. (४)
O aschinikumaro! Fire, the lord of the havya and the abomination, rises high in your yajna. The hymn that speaks your hymn, the same hymn is a many yagyakarta and enthusiasts. (4)
ऋग्वेद (मंडल 6)
अधि॑ श्रि॒ये दु॑हि॒ता सूर्य॑स्य॒ रथं॑ तस्थौ पुरुभुजा श॒तोति॑म् । प्र मा॒याभि॑र्मायिना भूत॒मत्र॒ नरा॑ नृतू॒ जनि॑मन्य॒ज्ञिया॑नाम् ॥ (५)
हे बहुतों के रक्षक अश्विनीकुमारो! सूर्यपुत्री तुम्हारे शतरक्षक रथ में आश्रय लेने के लिए बैठी थी. तुम यज्ञपात्र, देवों की इसी जन्म की बुद्धि से बुद्धिमान् नेता और नृत्य करने वाले बनो. (५)
O protector of many, Ashwinikumaro! Suryaputri was sitting in your Shatrakshak rath to take shelter. You become the wise leader and the dancer by the wisdom of this birth of the yagyapatra, the gods. (5)
ऋग्वेद (मंडल 6)
यु॒वं श्री॒भिर्द॑र्श॒ताभि॑रा॒भिः शु॒भे पु॒ष्टिमू॑हथुः सू॒र्यायाः॑ । प्र वां॒ वयो॒ वपु॒षेऽनु॑ पप्त॒न्नक्ष॒द्वाणी॒ सुष्टु॑ता धिष्ण्या वाम् ॥ (६)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम इस दर्शनीय कांति के द्वारा अपनी पत्नी सूर्या की शोभा के लिए पुष्टि प्राप्त करो. तुम्हारे घोड़े शोभा पाने के लिए दोड़ें. हे भली प्रकार स्तुत देवो! शोभन स्तुतियां तुम्ह प्राप्त हों. (६)
O aschinikumaro! You get confirmation for the splendor of your wife Surya by this spectacular kanti. Race your horses to get the glory. O god well! May you receive the praises. (6)
ऋग्वेद (मंडल 6)
आ वां॒ वयोऽश्वा॑सो॒ वहि॑ष्ठा अ॒भि प्रयो॑ नासत्या वहन्तु । प्र वां॒ रथो॒ मनो॑जवा असर्जी॒षः पृ॒क्ष इ॒षिधो॒ अनु॑ पू॒र्वीः ॥ (७)
हे अश्चिनीकुमारो! तेज चलने वाले व बोझा ढोने में कुशल घोड़े तुम्हें सोमरूपी अन्न के समीप ले जावें. तुम्हारा मन के समान तेज चलने वाला रथ अपनाने-योग्य, चाहने-योग्य एवं अधिक मात्रा वाले सोमरूपी अन्न के हेतु छोड़ा गया है. (७)
O aschinikumaro! Let the fast-moving and load-carrying horses take you close to the Somrupi food. Your heart-like fast-moving chariot is left for adoptable, desirable and high-volume somrupi food. (7)
ऋग्वेद (मंडल 6)
पु॒रु हि वां॑ पुरुभुजा दे॒ष्णं धे॒नुं न॒ इषं॑ पिन्वत॒मस॑क्राम् । स्तुत॑श्च वां माध्वी सुष्टु॒तिश्च॒ रसा॑श्च॒ ये वा॒मनु॑ रा॒तिमग्म॑न् ॥ (८)
हे बहुतों का पालन करने वाले अश्विनीकुमारो! तुम्हारा धन बहुत है. हमें दूसरों के पास न जाने वाली तथा प्रसन्न करने वाली गाय एवं अन्न दो. हे प्रमुदित होने वाले आश्विनीकुमारो! स्तोता, स्तुतियां एवं तुम्हारे दान के उद्देश्य से तैयार किया जाने वाला सोमरस तुम्हारे लिए है. (८)
O ashwinikumaro who follows many! Yours is a lot of money. Give us a cow and food that does not go to others and pleases us. O merry-to-be-inspiring Ashvinikumaro! The somras, which is prepared for the purpose of hymns, hymns and your charity, is for you. (8)