ऋग्वेद (मंडल 6)
नास्य॑ व॒र्ता न त॑रु॒ता न्व॑स्ति॒ मरु॑तो॒ यमव॑थ॒ वाज॑सातौ । तो॒के वा॒ गोषु॒ तन॑ये॒ यम॒प्सु स व्र॒जं दर्ता॒ पार्ये॒ अध॒ द्योः ॥ (८)
हे मरुतो! युद्ध में तुम जिसकी रक्षा करते हो, उसका न कोई प्रेरक होता है और न कोई हिंसक. तुम जिसके पुत्रों, पौत्रो, गायों एवं जल की रक्षा करते हो, वह युद्ध में तेजस्वी शत्रु की भी गायों को नष्ट करता है. (८)
O Maruts! The one you protect in battle has neither a motivator nor a violent one. The one whose sons, grandsons, cows and water you protect, he destroys even the cows of a brilliant enemy in battle. (8)