हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
उदु॒ ष्य दे॒वः स॑वि॒ता हि॑र॒ण्यया॑ बा॒हू अ॑यंस्त॒ सव॑नाय सु॒क्रतुः॑ । घृ॒तेन॑ पा॒णी अ॒भि प्रु॑ष्णुते म॒खो युवा॑ सु॒दक्षो॒ रज॑सो॒ विध॑र्मणि ॥ (१)
शोभनकर्म वाले सविता देव अपनी स्वर्णमय भुजाओं को दान के लिए उठाते हैं. महान्‌, नित्ययुवा व शोभनबुद्धि सविता लोक को धारण करने के लिए अपने जलपूर्ण हाथों को बढ़ाते हैं. (१)
Savita Dev, who is a gentleman, raises his golden arms for charity. Mahan, Nityayuva and Shobhan Buddhi extend their watery hands to hold savita loka. (1)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
दे॒वस्य॑ व॒यं स॑वि॒तुः सवी॑मनि॒ श्रेष्ठे॑ स्याम॒ वसु॑नश्च दा॒वने॑ । यो विश्व॑स्य द्वि॒पदो॒ यश्चतु॑ष्पदो नि॒वेश॑ने प्रस॒वे चासि॒ भूम॑नः ॥ (२)
हम उन्हीं सविता देव के अनुज्ञात एवं प्रशंसनीय दान पाने में समर्थ हों, जो सभी द्विपद एवं चतुष्पद और प्राणियों की स्थिति और जन्म में स्वतंत्र है. (२)
May we be able to receive the permissible and praiseworthy donation of the same Savita Dev, who is free in the condition and birth of all binomial and quadruped and beings. (2)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
अद॑ब्धेभिः सवितः पा॒युभि॒ष्ट्वं शि॒वेभि॑र॒द्य परि॑ पाहि नो॒ गय॑म् । हिर॑ण्यजिह्वः सुवि॒ताय॒ नव्य॑से॒ रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒घशं॑स ईशत ॥ (३)
हे सविता! तुम अपने अहिंसित एवं सुखकारक तेजों द्वारा हमारे घर की रक्षा करो. हे हिरण्यवाक्‌! तुम नवीन सुख एवं रक्षा के कारण बनो. हमारा अहित चाहने वाला हमारा स्वामी न हो. (३)
O Savita! You protect our home with your non-violent and soothing speeds. O Hiranyavak! You become the cause of new pleasures and defenses. Let not our master be the one who wants our harm. (3)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
उदु॒ ष्य दे॒वः स॑वि॒ता दमू॑ना॒ हिर॑ण्यपाणिः प्रतिदो॒षम॑स्थात् । अयो॑हनुर्यज॒तो म॒न्द्रजि॑ह्व॒ आ दा॒शुषे॑ सुवति॒ भूरि॑ वा॒मम् ॥ (४)
दानयुक्त मन वाले, स्वर्णमय हाथों वाले, सोने की ठोड़ी वाले, यज्ञ के पात्र व प्रसन्नवचन वाले सविता देव रात्रि की समाप्ति पर उठें. वे हव्यदाता यजमान के लिए बहुत सा अन्न दें. (४)
Savita Dev with a charitable mind, with a golden hand, with a golden chin, a sacrificial vessel and a cheerful expression, should rise at the end of the night. They give a lot of food to the havandaar host. (4)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
उदू॑ अयाँ उपव॒क्तेव॑ बा॒हू हि॑र॒ण्यया॑ सवि॒ता सु॒प्रती॑का । दि॒वो रोहां॑स्यरुहत्पृथि॒व्या अरी॑रमत्प॒तय॒त्कच्चि॒दभ्व॑म् ॥ (५)
सविता व्याख्यानदाता के समान अपने स्वर्णमय एवं शोभन अवयवों वाले हाथों को उठावें. वे धरती से आकाश के स्थानों में पहुंचें एवं सभी गतिशील वस्तुओं को आनंद दें. (५)
Savita should raise her golden and soothing hands like a lecturer. They reach the places of the sky from the earth and give joy to all the moving objects. (5)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
वा॒मम॒द्य स॑वितर्वा॒ममु॒ श्वो दि॒वेदि॑वे वा॒मम॒स्मभ्यं॑ सावीः । वा॒मस्य॒ हि क्षय॑स्य देव॒ भूरे॑र॒या धि॒या वा॑म॒भाजः॑ स्याम ॥ (६)
हे सविता! हमें आज धन दो एवं कल भी धन देना. हमें प्रतिदिन धन दो. हे देव! तुम निवास के कारणरूप विशाल धन के दाता हो. हम इस स्तुति द्वारा धन के भागी बनेंगे. (६)
O Savita! Give us money today and give us money tomorrow. Give us money every day. Oh, God! You are the giver of huge wealth because of residence. We will become partakers of wealth by this praise. (6)