ऋग्वेद (मंडल 6)
ब॒ह्वी॒नां पि॒ता ब॒हुर॑स्य पु॒त्रश्चि॒श्चा कृ॑णोति॒ सम॑नाव॒गत्य॑ । इ॒षु॒धिः सङ्काः॒ पृत॑नाश्च॒ सर्वाः॑ पृ॒ष्ठे निन॑द्धो जयति॒ प्रसू॑तः ॥ (५)
यह तरकस बहुत से बाणों का पिता है. बहुत से बाण इसके पुत्र हैं. बाण निकालने पर इससे त्रिश्चा शब्द होता है. तरकस योद्धा की पीठ पर बंधा हुआ है, युद्धों को जानकर बाणों को जन्म देता है एवं सब सेनाओं को जीतता है. (५)
This trick is the father of many arrows. Many arrows are its sons. When an arrow is removed, it contains the word trischa. The tarkas is tied on the warrior's back, knowing wars gives rise to arrows and conquers all armies. (5)