हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.103.7

मंडल 7 → सूक्त 103 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 103
ब्रा॒ह्म॒णासो॑ अतिरा॒त्रे न सोमे॒ सरो॒ न पू॒र्णम॒भितो॒ वद॑न्तः । सं॒व॒त्स॒रस्य॒ तदहः॒ परि॑ ष्ठ॒ यन्म॑ण्डूकाः प्रावृ॒षीणं॑ ब॒भूव॑ ॥ (७)
हे मेंढको! जिस दिन अधिक वर्षा हो, उस दिन तुम इस प्रकार शब्द करते हुए तालाब में चारों ओर घूमो, जिस प्रकार अतिरात्र नामक यज्ञ में ब्राहमण सोमरस के चारों आर मंत्र पढ़ते हैं. (७)
O frogs! On the day when it rains more, walk around the pond with the words like this, just as in the yagna called Atiratra, brahmins recite the mantras around the Somras. (7)