हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.103.8

मंडल 7 → सूक्त 103 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 103
ब्रा॒ह्म॒णासः॑ सो॒मिनो॒ वाच॑मक्रत॒ ब्रह्म॑ कृ॒ण्वन्तः॑ परिवत्स॒रीण॑म् । अ॒ध्व॒र्यवो॑ घ॒र्मिणः॑ सिष्विदा॒ना आ॒विर्भ॑वन्ति॒ गुह्या॒ न के चि॑त् ॥ (८)
ये मेंढक उसी प्रकार बोलते हैं, जिस प्रकार सोमरस धारण करने वाले स्तोता वार्षिक स्तुति करते है. प्रवर्ग का आचरण करने वाले ऋत्विजों के समान धूप से गीले शरीर वाले एवं बिलों में छिपे हुए मेंढक प्रकट होते हैं. (८)
These frogs speak in the same way that the hymns holding the Somras give annual praise. Like the ritwijas who conduct the class, the frogs appear to be wet with sun and hidden in the burrows. (8)