हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.104.13

मंडल 7 → सूक्त 104 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 104
न वा उ॒ सोमो॑ वृजि॒नं हि॑नोति॒ न क्ष॒त्रियं॑ मिथु॒या धा॒रय॑न्तम् । हन्ति॒ रक्षो॒ हन्त्यास॒द्वद॑न्तमु॒भाविन्द्र॑स्य॒ प्रसि॑तौ शयाते ॥ (१३)
पापी एवं झूठ बोलने वाला शक्तिशाली हो, तब भी सोम उसे नहीं छोड़ते. वे असत्यवादी एवं राक्षस को मारते हैं. ये दोनों मरकर इंद्र के बंधन में सोते हैं. (१३)
Even if the sinner and the liar is powerful, Mon does not leave him. They kill the untrust and the monster. Both of them die and sleep in the bond of Indra. (13)