ऋग्वेद (मंडल 7)
इन्द्रा॑सोमा दु॒ष्कृतो॑ व॒व्रे अ॒न्तर॑नारम्भ॒णे तम॑सि॒ प्र वि॑ध्यतम् । यथा॒ नातः॒ पुन॒रेक॑श्च॒नोदय॒त्तद्वा॑मस्तु॒ सह॑से मन्यु॒मच्छवः॑ ॥ (३)
हे इंद्र एवं सोम! तुम बुरे कर्म करने वाले राक्षसों को वारक मरुस्थल एवं आश्रयहीन अंधकार में फेंक कर मारो, जिससे एक भी राक्षस जीवित न उठ सके. क्रोधयुक्त तुम्हारा वह प्रसिद्ध बल राक्षसों को दबाने में समर्थ हो. (३)
O Indra and Mon! You kill the demons who do evil deeds by throwing them into the wark desert and shelterless darkness, so that not a single monster can come alive. That famous force of angry yours be able to suppress the demons. (3)