हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.15.1

मंडल 7 → सूक्त 15 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
उ॒प॒सद्या॑य मी॒ळ्हुष॑ आ॒स्ये॑ जुहुता ह॒विः । यो नो॒ नेदि॑ष्ठ॒माप्य॑म् ॥ (१)
हे अध्वर्युगण! समीप बैठने योग्य, अभिलाषापूरक, परम समीप, संबंधी एवं बंधुरूप अग्नि के मुख में हवि डालो. (१)
O teacher! Sit nearby, full of desire, close to, relative and brotherly put havi in the mouth of the agni. (1)