हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.15.2

मंडल 7 → सूक्त 15 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
यः पञ्च॑ चर्ष॒णीर॒भि नि॑ष॒साद॒ दमे॑दमे । क॒विर्गृ॒हप॑ति॒र्युवा॑ ॥ (२)
कवि, गृहपालक एवं युवा अग्नि पंचजनों के सामने प्रत्येक घर में स्थित होते हैं. (२)
Poets, homeowners and young agnimen are located in every house in front of the Panchjans. (2)