हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.15.13

मंडल 7 → सूक्त 15 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
अग्ने॒ रक्षा॑ णो॒ अंह॑सः॒ प्रति॑ ष्म देव॒ रीष॑तः । तपि॑ष्ठैर॒जरो॑ दह ॥ (१३)
हे अग्नि! हमें पाप से बचाओ. हे जरारहित अग्नि देव! तुम अपने अतिशय तापदायक तेजों द्वारा शत्रुओं को जलाओ. (१३)
O agni! Save us from sin. O God of unheated agni! You burn the enemies with your overheating radiances. (13)