हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.15.14

मंडल 7 → सूक्त 15 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 15
अधा॑ म॒ही न॒ आय॒स्यना॑धृष्टो॒ नृपी॑तये । पूर्भ॑वा श॒तभु॑जिः ॥ (१४)
हे अपराजित अग्नि! तुम इस समय हमारे मनुष्यों की रक्षा के लिए लौह से बनी विस्तृत नगरी बनाओ. (१४)
O undefeated agni! You make an elaborate city made of iron to protect our humans at this time. (14)