हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.17.4

मंडल 7 → सूक्त 17 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
स्व॒ध्व॒रा क॑रति जा॒तवे॑दा॒ यक्ष॑द्दे॒वाँ अ॒मृता॑न्पि॒प्रय॑च्च ॥ (४)
हे जातवेद अग्नि! तुम मरणरहित देवों को शोभनयज्ञ वाला करो, हवि से उनका यज्ञ करो और उन्हें स्तोत्रों से प्रसन्न करो. (४)
O Jativeda Agni! You should make the godless without death a bearer yajna, perform their yajna with havi and please them with hymns. (4)