हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.17.5

मंडल 7 → सूक्त 17 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 17
वंस्व॒ विश्वा॒ वार्या॑णि प्रचेतः स॒त्या भ॑वन्त्वा॒शिषो॑ नो अ॒द्य ॥ (५)
हे विशिष्ट बुद्धि वाले अग्नि! हमें सब संपत्तियां दो. हमारे आशीर्वाद आज सच्चे हों. (५)
O agni with a specific intellect! Give us all the properties. May our blessings be true today. (5)