हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.18.22

मंडल 7 → सूक्त 18 → श्लोक 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
द्वे नप्तु॑र्दे॒वव॑तः श॒ते गोर्द्वा रथा॑ व॒धूम॑न्ता सु॒दासः॑ । अर्ह॑न्नग्ने पैजव॒नस्य॒ दानं॒ होते॑व॒ सद्म॒ पर्ये॑मि॒ रेभ॑न् ॥ (२२)
हे अग्नि! मैंने इंद्र की स्तुति करके राजा देववान के नाती एवं पिजवन के पुत्र सुदास से रथ पाया था. मैं होता के समान यज्ञशाला में जाता हूं. (२२)
O agni! I had received the chariot from Sudas, the grandson of King Devvan and son of Pijvan, by praising Indra. I go to the yajnashala like I would. (22)